[ad_1]

हाइलाइट्स

  • दिल्ली यूनिवर्सिटी एडमिशन प्रक्रिया में बदलाव कर सकता है।
  • ये बदलाव अगले साल से हो सकता है।
  • इसके लिए फिलहाल प्लान बन रहे हैं।

दिल्ली यूनिवर्सिटी अंडरग्रेजुएट एडमिशन को लेकर नई योजना बना रहा है। दिल्ली यूनिवर्सिटी अगले साल से बोर्ड परीक्षा के अंकों और एंट्रेंस परीक्षा के अंकों को 50-50 वेटेज देकर छात्रों को एडमिशन देने की योजना तैयार कर रहा है। यूनिवर्सिटी के हाल ही में नियुक्त कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह के अनुसार, कट-ऑफ आधारित प्रवेश की वर्तमान प्रणाली “सख्त” अकंन पॉलिसी वाले बोर्ड के छात्रों को नुकसान में डालती है।

प्रो सिंह ने कहा, ”हमारे पास एडमिशन के लिए कई विकल्प हैं- पहला मौजूदा सिस्टम को जारी रखना, दूसरा विभिन्न बोर्डों के अंकों का नॉर्मलाइजेशन हो सकता है, तीसरा एडमिशन के लिए एंट्रेंस परीक्षा और चौथा एंट्रेंस परीक्षा को 50 फीसदी और बोर्ड के अंकों को 50 फीसदी वेटेज देना शामिल हैं। इस पर अब अकादमिक परिषद और कार्यकारी परिषद को फैसला करना है।”

प्रोफेसर सिंह द्वारा गठित नौ सदस्यीय पैनल ने ग्रेजुएट एडमिशन प्रक्रिया में ‘पर्याप्त ऑब्जेक्टिविट’ सुनिश्चित करने के लिए डीयू को एक सामान्य एंट्रेस परीक्षा आयोजित करने की सिफारिश की।

राजस्थान: JEN भर्ती को लेकर क्यों हो रहा विवाद? यहां जानें क्या है मामला

इस साल सबसे ज्यादा सीबीएसई बोर्ड के छात्रों को एडमिशन दिल्ली यूनिवर्सिटी में हुआ है। इसके बाद केरल बोर्ड ऑफ हायर सेकेंडरी एजुकेशन, बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन, हरियाणा, आईसीएसई और बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन राजस्थान के छात्रों के सबसे ज्यादा एडमिशन हुए है। प्रो सिंह ने कहा कि वह कट-ऑफ आधारित एडमिशन के पक्ष में नहीं हैं। ऐसे सिस्ट में उन छात्रों को फायदा होता है जिनके बोर्ड ‘lenient’ मार्किंग करते हैं।

प्रो सिंह ने कहा, “उदाहरण के लिए, यूपी बोर्ड के छात्रों को दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन नहीं मिल रहा है। कुछ बोर्ड उदार नहीं हैं। यहां तक कि हरियाणा बोर्ड और पड़ोसी राज्यों के छात्रों को भी यहां एडमिशन नहीं मिल रहा है, हमें केरल से बड़ी संख्या में छात्र मिल रहे हैं, लेकिन तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश से नहीं।”

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *