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डीयू के एग्जिक्यूटिव काउंसिल (ईसी) के 6 मेंबर की कमेटी ने रिपोर्ट दी कि दिल्ली सरकार का फैसला मनमाना है, कॉलेज को बिना किसी वजह डी-एफिलिएट नहीं किया जा सकता। इस कमेटी की इलेक्टेड ईसी मेंबर मोनिका अरोड़ा कहती हैं, कैबिनेट के फैसले में यह भी कहा गया कि कॉलेज डीयू से डी-एफिलिएशन के बाद एयूडी में मर्ज होगा और डीयू को लिखा कि वो इस पर कमेंट दे। मगर सरकार ने डीयू को कभी प्रस्ताव नहीं भेजा। कॉलेज को 100% फंड दिल्ली सरकार से मिलता है मगर कॉलेज में इस सेशन में अब तक एडमिशन नहीं करवाया गया। जब डीयू ने इसे डी-एफिलिएट ही नहीं किया, तो यह एयूडी का कैसे हो सकता है! डीयू के एक्ट और ऑर्डिनेंस में कहीं नहीं लिखा है कि इस तरह से कोई कॉलेज उससे हट सकता है।
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नए वाइस चांसलर प्रो योगेश सिंह ने भी इसे लेकर एक सब-कमेटी बनाई, जिसकी दो मीटिंग हो चुकी है। मेंबर मोनिका अरोड़ा कहती हैं, हमारे कहने के बाद पहली बार 15 नवंबर को दिल्ली सरकार की ओर से कॉलेज को एयूडी में मर्ज करने का प्रस्ताव दिया है। इसका जवाब जल्द ही डीयू की ओर से भेजा जाएगा। कमेटी कॉलेज को एयूडी में मर्ज करने के खिलाफ है, इसके सेंट्रल यूनिवर्सिटी से स्टेट यूनिवर्सिटी में जाने की कोई वजह नहीं बनती।
‘यह स्टूडेंट्स के लिए बड़ा नुकसान’
दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स असेासिएशन (डूटा) प्रेजिडेंट डॉ. ए. के. भागी कहते हैं, अब तक कॉलेज ऑफ आर्ट्स्स में सरकार की वजह से एडमिशन ही नहीं हुए हैं, यह स्टूडेंट्स का बड़ा नुकसान है। इस कॉलेज में देशभर से स्टूडेंट्स एडमिशन लेते हैं और इस फाइन आर्ट्स्स कॉलेज का वजूद डीयू के साथ रहने में ही है। दिल्ली सरकार एयूडी में अलग फाइन आर्ट्स्स डिपार्टमेंट खोल सकती है। 10 दिसंबर की अकैडमिक काउंसिल की मीटिंग और बाकी फोरम में हम इसे मजबूती के साथ रखेंगे। 12 कॉलेजों को ग्रांट ना मिलने और अपॉइंटमेंट पर सरकार के रोक लगाने पर भी हम विरोध करेंगे। टीचर्स को सैलरी नहीं मिलेगी, कॉलेजों को टीचर्स नहीं मिलेंगे, तो यह हर तरह से स्टूडेंट्स की पढ़ाई का ही नुकसान होगा।
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